अपने समय को कण्ट्रोल में लीजिये – Take Charge of Your Time Management

Time Management

टाइम मैनेजमेंट (Time Management) एक ऐसा विषय है जिसके बारे में हम रोजाना सोचते है। वक्त हमारी जिन्दंगी में सबसे इम्पोर्टेन्ट है। हम हमेशा यह कहते है कि उसके पास समय ज्यादा है और मेरे पास कम। हम सबको पता है कि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। फिर भी हम रोज अपना समय बर्बाद करते है, ये सोचने में कि हम अपना समय बर्बाद क्यों कर रहे है।
आज आपको 4 ऐसे टिप्स मिलने वाले है, जिससे आप अपने समय पर कण्ट्रोल रख कर अपनी एफिशिएंसी और प्रोडक्टिविटी कई गुना बड़ा लोगे।

टाइम मैनेजमेंट एक कल्पना है? Time Management is a Myth?

“टाइम मैनेजमेंट का मतलब होता है खुद को मैनेज करना।” हम सभी के पास २४ घंटे है है, और ये किसी के लिए भी चेंज नहीं होता है। हम सिर्फ ये कर सकते है की अपने आप को मैनेज करे,अपने बिहैवियर को मैनेज करे। तो ये सोचना बंद कर दीजिये की आप टाइम को मैनेज कर सकते है। आप सिर्फ खुदको मैनेज कर सकते है

1. आप अभी अपना समय कहा खर्च कर रहे है (How you are currently spending your time)

याद रखिये टाइम मैनेजमेंट का मतलब आपके बेहेवियर को मैनेजमेंट करना है, टाइम को नहीं। अगर आप अपने टाइम को मैनेज करना चाहते है तो उसके लिए पहले आपको ये पता करना होगा कि आप अपना टाइम कहा खर्च कर रहे है। इसके लिए आपको एक हफ्ते तक अपने टाइम का हिसाब रखना है या यु कह लीजिये की अपने टाइम का ऑडिट करना है। इस ऑडिट से आपको 4 बाते क्लियर हो जाएगी। 

१. आप एक दिन में कितना काम कर सकते है – या यु कह लीजिये की एक दिन में आप क्या accomplish कर सकते है२. ऐसी एक्टिविटीज identify कर सकते है जोआपको सबसे अच्छे रिजल्ट्स दे

३. ऐसी एक्टिविटीज identify कर सकते है जो आपका समय बर्बाद कर रही है

४. दिन का वह समय जब आप सबसे ज्यादा प्रोडक्टिव होते है – जिससे कि आप इम्पोर्टेन्ट प्रोजेक्ट्स या एक्टिविटीज के ऊपर इस टाइम पर काम कर सकते है

जैसे ही आपका ये ऑडिट कम्पलीट होगा, आपको पता चल जाएगा की आपका कितना समय unproductive एक्टिविटीज पर खर्च हो रहा है। 

2. एक डेली schedule बनाये और उसको फॉलो करे

हमारा ऑब्जेक्टिव है अपने बिहैवियर में बदलाव लाना जिससे की हम अपने गोल्स को अचीव कर पाए। अपनी प्रोडक्टिविटी improve कर पाए, और stress कम कर पाए।
कभी भी बिना एक टू डु लिस्ट के अपने दिन की शुरुआत मत कीजिये। ये टू डु लिस्ट (To Do List) आपको कभी भी कोई भी task को मिस नहीं करने देगी। रोजाना अपना दिन ख़त्म करने से पहले अगले दिन के लिए एक टू डु लिस्ट बना लीजिये जिससे, आपके आने वाले दिन की शुरुआत एक प्लानिंग के साथ हो। जब आप यह लिस्ट बना लेंगे तो आपको कुछ अपने माइंड में रखने की जरुरत नहीं होगी, इससे आपको नींद अच्छी आएगी और अगली सुबह आप फ्रेश रहेंगे।
और अगर आप रात में यह लिस्ट नहीं बना सकते तो अपने दिन की शुरुआत में इस लिस्ट को बना लीजिये। जब आप अपना दिन एक organised तरीके से ऑपरेट करेंगे तो आप realize करेंगे की आपकी efficiency और प्रोडक्टिविटी नेक्स्ट लेवल पर है।

3. Allocate योर टाइम wisely

जब आपने अपनी टू डु लिस्ट बना ली है, तो उसमे लिखे हुए tasks का prioritization करना बहुत जरुरी है। अपने टास्क को इस तरह से prioritize कीजिये जिससे, अर्जेंट पहले, इम्पोर्टेन्ट बाद में, और बाकि के सभी काम लास्ट में या अंत में आये। इस तरह से आप ये ensure कर पाएंगे की आपने सभी काम तय समय और प्राथमिकता से कम्पलीट कर लिए है। जब आप इस तरह से टू डु लिस्ट को फॉलो करेंगे तो आपको अपने आप में एक accomplishment की फीलिंग आएगी।

Stephen कोवे ने अपनी बुक फर्स्ट थिंग फर्स्ट में एक टाइम मैनेजमेंट metrix का जिक्र किया है जिसे आप अपने tasks को prioritize करने के लिए यूज़ कर सकते है, इस मीट्रिक को urgent important मीट्रिक भी कहते है।

     १. सबसे पहले एक स्क्वायर लीजिये और उसे चार बराबर हिस्सों में बाट लीजिये

     २. ऊपर के दो ब्लॉक्स में से एक में urgent और  दूसरे में not urgent लिख दीजिये

     ३. लेफ्ट साइड के एक ब्लॉक में important और दूसरे में not important लिख दीजिये

अब अपने टास्कस को इन ब्लॉक्स के अकॉर्डिंग असाइन कीजिये

     १. इम्पोर्टेन्ट एंड अर्जेंट; आपका काम, एक्साम्स आ रहे है तो स्टडी, कोई असाइनमेंट जिसकी डेडलाइन पास आ रही है। ये सभी काम इम्पोर्टेन्ट भी है और अर्जेंट भी।

     २. इम्पोर्टेन्ट but नॉट अर्जेंट: excesize करना, बुक्स पढ़ना, अच्छे लोगों के साथ समय बिताना। ये सभी आपके लिए इम्पोर्टेन्ट है पर अर्जेंट नहीं है।

     ३. अर्जेंट but नॉट इम्पोर्टेन्ट: घर से फ़ोन आना, अर्जेंट हो सकता है पर शायद इम्पोर्टेन्ट न हो, बॉस का कॉल, उनके लिए अर्जेंट हो सकता है पर शायद आपके लिए न हो।

     ४. नॉट अर्जेंट, नॉट इम्पोर्टेन्ट – जरुरत से ज्यादा सोना, नेटफ्लिक्स देखना

जब आप इस prioritization मेट्रिक्स में मास्टर कर लेते है तो आप अपना समय और एनर्जी ऐसे tasks पर फोकस कर सकते है जो वास्तव में इम्पोर्टेन्ट भी है और अर्जेंट भी।

4.  ना बोलना सीखिए

अब जो पॉइंट आप पढ़ने जा रहे है उसे पढ़कर आपके चेहरे पर हल्की सी स्माइल आने वाली है। और अगर ये स्माइल आ गई है, तो कमेंट करके बताइये।

अगर आप वास्तव में अपना टाइम मैनेज करना चाहते है, खुद को organize करना चाहते है तो आपको ना बोलना सीखना होगा।  सिर्फ आप ही जानते है कि आप अपना टाइम कहा दे सकते है। अगर आपको लगता है कि किसी काम को करने से मना करके आप उस समय में किसी इम्पोर्टेन्ट टास्क पर फोकस कर सकते है तो उस काम के लिए ना बोल दीजिये। और अगर आप कोई ऐसा काम या प्रोजेक्ट कर रहे है जो कोई वैल्यू addition नहीं कर रहा है तो उस प्रोजेक्ट को करने से मना कर दीजिये। 

80/20 रूल याद रखिये, आपके 20% इनपुट्स से, 80% रिजल्ट आता है, इसलिए अपने efforts को सही कामो में लगाइये।

अगर आप किसी काम को करने से मना नहीं कर सकते को उसे किसी और को डेलिगेट/transfer कर दीजिये। ये मुश्किल हो सकता है पर अगर आपके पास एक टैलेंटेड टीम है तो आप ये कोशिश करके देख सकते है। 

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अंकुर वरिकू ने कहा है कि, टाइम एलोकेशन (Time is allocation) है, टाइम एनर्जी (Time is energy) है, टाइम मनी (Time is money) है। मै उम्मीद करता हूँ कि आप इन टिप्स को उपयोग करके अपने बिहैवियर में जरुरी बदलाव लाएंगे और अपने टाइम को efficiently मैनेज करके अपनी प्रोडक्टिविटी को इम्प्रूव करेंगे। मै आपके कमैंट्स का वेट करूँगा।

नमस्कार।